700 वर्ष पुराना गीत

January 2, 2011

महान अबुल हसन यमीनुद्दीन ख़ुसरौ (1253-1325 CE) की स्मृति में ।

अमीर खुसरो के इस गीत को बेहतरीन आवाज़ दी है, हिन्दुस्तान के अव्वल सू्फ़ी गायक उस्ताद मेराज निज़ामी ने, आप दिल्ली में हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया (1236-1325) की दरगाह के निकट रहते है, हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया खुसरो के गुरू थे।

इन शब्दों में गुरू महिमा, और उससे प्रेम का अलौकिक प्रस्तुतीकरण किया गया है, और उसी गुरू के माध्यम से उसे पाने की चेष्टा ! यकीनन इन्सान कही भी इतना प्रेम भरा समर्पण करे तो वह चीज खुदा हो जाए, और वह स्वयं..स्वयं न रहे..यानि खुद खुदा हो जाए... उसका हिस्सा बन जाए ।

इस महान प्रेम के जज्बें के साथ किसी कार्य में अपने को समर्पित कर देने वाला इन्सान उस कार्य को उसके अन्जाम तक जरूर पहुंचा देगा..क्योंकि अब यह उसका काम होगा...!

हमारी धरती के ये सुन्दर जीव जो उस प्रकृति का हिस्सा है जिसके हम, इनके अधिकारों की रक्षा का जिम्मा हमारा है, क्योंकि हमने ही उनके आवास, भोजन पर जबरियन कब्जा कर लिया...चलो उनके लिए कुछ भी बेहतर करने का हम सकंल्प ले...यह भी उसका काम होगा..और वह इसे बहुत पसन्द करेगा...और तू फ़िर उसकी निगेहबानी में होगा !

कृष्ण

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वन्य जीवन व पर्यावरण पर आधारित पहली हिन्दी वेबसाइट

May 18, 2010

दुधवा लाइव पत्रिका का सृजन उन कारणों की परिणित है, जिन्हे सरकारें व समाज़ के जिम्मेदार लोग नज़र्-ए-अन्दाज करते है। हम अपनी राष्ट्रीय प्राकृतिक संपदा के संरक्षण व संवर्धन की इस मुहिम में आप सभी को आमंत्रित करते है, जो अपने चारों तरफ़ की उन सभी गतिविधियों को देखते है, और विचार भी करते है। किन्तु बेबाकी से उस बात की अभिव्यक्ति नही कर पाते या फ़िर मीडिया के बदलते परिवेश में ऐसी महत्वपूर्ण खबरों व लेखों को जगह नही मिल पाती है। हम आप से वादा करते है कि हम आप की बात को उसके नियत स्थल तक पहुंचाने की भरसक कोशिश करेंगे। हमारी धरती की छिन्न-भिन्न होती दशा-व्यथा, वनों और उनके इतिहास, जैव-विविधिता, प्राकृतिक संपदा और उससे जुड़ा हमारा ज्ञान , जीवों पर हो रहे अत्याचार आदि महत्वपूर्ण मुद्दों की तस्वीर दुधवा लाइव के जरिए लोगों तक पहुंचायेंगे। ये एक ऐसा मंच होगा जो संरक्षित वनों व वन्य जीवों के अलावा हमारे गाँव-जेवार के पशु-पक्षियों और खेत-खलिहानों की बाते करेगा। ग्रामीण अंचल के लोगों के प्राकृतिक ज्ञान की बौद्धिक संपदा के संरक्षण को हम प्राथमिकता देंगे। इन प्रयासों में हमें आप सभी का निरन्तर सहयोग चाहिए, तभी जाकर हम अपने सही लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे।

बापू के शब्दों के साथ  "किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है।"
धन्यवाद
संपादक/माडरेटर
दुधवा लाइव
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